नई दिल्ली: नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 6 अक्टूबर को कहा कि सरकार विमान ईंधन, यानी एविएशन टर्बाइन फ़्यूल की क़ीमत को लेकर एयरलाइनों और तेल विपणन कंपनियों से बातचीत कर रही है। इससे पहले लगातार तीसरे महीने हवाई ईंधन महंगा हुआ।
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट बड़ी चिंताओं में से एक है, क्योंकि इसने एटीएफ़ की क़ीमतें बढ़ाकर इस क्षेत्र पर भारी बोझ डाला है। उन्होंने कहा कि सरकार "स्थिति का आकलन करने के लिए" एयरलाइनों और तेल कंपनियों से बात कर रही है, और मंत्रालय फ़ैसला लेने से पहले सभी हितधारकों की बैठक बुलाएगा।
फ़्री प्रेस जर्नल के मुताबिक़, 1 अक्टूबर को घरेलू एटीएफ़ की क़ीमत 13.22 फ़ीसदी, यानी करीब 16 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 121.28 रुपये से 137 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। यह लगातार तीसरी मासिक बढ़ोतरी थी।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़, 1 सितंबर को क़ीमत 6.28 रुपये प्रति लीटर, यानी 5.46 फ़ीसदी बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हुई थी, और उससे पहले 1 अगस्त को 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। तीन महीनों में यह करीब 27 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी बैठती है। सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मानक क़ीमतों और विनिमय दर के आधार पर हर महीने की पहली तारीख़ को एटीएफ़ और एलपीजी की क़ीमतें तय करती हैं, और वैट जैसे स्थानीय करों की वजह से अंतिम क़ीमत राज्य-दर-राज्य अलग होती है।
फ़्री प्रेस जर्नल के मुताबिक़, ईंधन एयरलाइनों के सबसे बड़े ख़र्चों में से एक है। पीटीआई ने सितंबर में बताया था, "ये दो बढ़ोतरियां एयरलाइनों पर वित्तीय बोझ बढ़ाएंगी, जिनके परिचालन ख़र्च का 40 फ़ीसदी तक हिस्सा एटीएफ़ है।"
सरकार निर्यात शुल्क के ज़रिए भी ईंधन की आपूर्ति संभाल रही है। फ़्री प्रेस जर्नल के मुताबिक़, पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र ने 27 मार्च 2026 को डीज़ल और एटीएफ़ के निर्यात पर शुल्क लगाया, ताकि निर्यात कम हो और देश में ईंधन उपलब्ध रहे, और तब से हर पखवाड़े इन दरों में बदलाव किया गया है।
1 अक्टूबर से शुरू पखवाड़े के लिए एटीएफ़ निर्यात पर शुल्क 15 रुपये से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल निर्यात पर 20 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। निर्यात शुल्क घटने से घरेलू एयरलाइनों के लिए क़ीमत कम नहीं होती। सरकारी अधिसूचना में कहा गया कि देश में बिकने वाले पेट्रोल और डीज़ल पर उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं है।
साल की शुरुआत में हवाई ईंधन कहीं ज़्यादा महंगा था। आउटलुक बिज़नेस ने तब बताया था कि 1 अप्रैल को, पश्चिम एशिया संघर्ष के चरम पर, दिल्ली में एटीएफ़ की क़ीमत दोगुनी से ज़्यादा, 114.5 फ़ीसदी बढ़कर 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई थी, और पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार गई थी। वैश्विक तेल क़ीमतें करीब 50 फ़ीसदी बढ़ चुकी थीं, और हवाई क्षेत्र बंद होने से एयरलाइनें पहले से लंबे रास्तों से उड़ान भर रही थीं। आउटलुक बिज़नेस ने तब बताया था कि एक ऐसी व्यवस्था पर काम हो रहा है जिससे घरेलू एयरलाइनों को पूरी बढ़ोतरी न झेलनी पड़े।
हवाई ईंधन की बढ़ोतरी फ़रवरी के आख़िर में पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद ऊर्जा लागत में आई व्यापक बढ़त का हिस्सा है। पीटीआई के मुताबिक़, होटलों और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाली व्यावसायिक एलपीजी फ़रवरी से जून के बीच 19 किलो के सिलेंडर पर 1,373 रुपये बढ़कर 1,740.50 रुपये से रिकॉर्ड 3,113.50 रुपये हो गई थी, और फिर जुलाई और अगस्त में दो बार घटी। 1 सितंबर को व्यावसायिक एलपीजी फिर 9.50 रुपये बढ़कर 2,747.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई। मई में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं, और घरेलू रसोई गैस मार्च में 60 रुपये और जून में 29 रुपये महंगी होकर 14.2 किलो के सिलेंडर पर 942 रुपये हो गई।
नायडू ने यह नहीं बताया कि सरकार किन विकल्पों पर विचार कर रही है या हितधारकों की बैठक कब होगी।









