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EEST TV ई-पेपर, बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

पेज 3 पर लौटें: राज्य

पश्चिम बंगाल

"मुझे छह महीने दीजिए": शुभेंदु अधिकारी ने कहा, पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता आएगी

कोलकाता में गुंबद और सामने फूलों के बग़ीचे के साथ स्तंभों वाला सफ़ेद पश्चिम बंगाल विधानसभा भवन

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार छह महीने में राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करेगी, और उसके बाद धर्मांतरण और जिसे उन्होंने "लव जिहाद" और "लैंड जिहाद" कहा, उनके ख़िलाफ़ क़ानून लाएगी।

ऑर्गनाइज़र के अनुसार अधिकारी ने कहा, "उत्तराखंड और गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी लागू होगी। मैं आपको वचन देता हूं, मुझे छह महीने दीजिए।" द प्रिंट के अनुसार वे रविवार, 4 अक्टूबर को कोलकाता में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशती के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, "यह सरकार यहां किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि की इजाज़त नहीं देगी।"

समान नागरिक संहिता अलग-अलग धार्मिक समुदायों के अलग निजी क़ानूनों की जगह एक नागरिक क़ानून लाती है। द ट्रिब्यून ने जुलाई में बताया था कि पश्चिम बंगाल का समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 का मसौदा सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक़, बिना वसीयत उत्तराधिकार और वसीयती उत्तराधिकार से जुड़ा है। इसका घोषित मक़सद धर्म, आस्था या समुदाय से परे विवाह, तलाक़, विरासत और गोद लेने के नागरिक क़ानूनों को एक जैसा बनाना है।

द ट्रिब्यून के अनुसार राज्य कैबिनेट ने 2 जुलाई को फ़ैसला किया कि नौ सदस्यों की एक समिति मसौदा विधेयक की जांच करेगी और विधानसभा में पेश होने से पहले बदलाव सुझाएगी। एक सरकारी अधिसूचना में प्रस्तावित क़ानून के "व्यापक असर और विशाल स्वरूप" का हवाला दिया गया।

समिति की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना प्रकाश देसाई हैं। इसके सदस्यों में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, रेज़िडेंट कमिश्नर दुष्यंत नरियाला, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, शिक्षाविद रत्ना भट्टाचार्य, गौड़ बंग विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्र, अधिवक्ता उस्मान ग़नी मल्लिक और पूर्व कार्यकारी निदेशक निर्माल्य भट्टाचार्य शामिल हैं।

जस्टिस देसाई सितंबर 2011 से अक्टूबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट में रहीं और मार्च 2020 से परिसीमन आयोग की अध्यक्ष हैं। 2018 में उन्होंने लोकपाल के लिए आठ सदस्यों वाली खोज समिति की अध्यक्षता की थी। विकिपीडिया के अनुसार मई 2022 में उन्हें उत्तराखंड की यूसीसी समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया था।

द ट्रिब्यून के अनुसार तब अधिकारी ने कहा था, "एक राष्ट्र और एक क़ानून होगा, दो क़ानून नहीं।"

ऑर्गनाइज़र ने उत्तराखंड और गुजरात को ऐसे राज्य बताया, जो यूसीसी लागू करने की ओर बढ़ चुके हैं, और लिखा कि गुजरात के यूसीसी विधेयक को अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली। विहिप ने कहा कि पश्चिम बंगाल ऐसा करने वाला तीसरा राज्य होगा। द ट्रिब्यून ने जुलाई में पश्चिम बंगाल को उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी की ओर बढ़ने वाला चौथा राज्य गिना था।

विहिप ने इस घोषणा का स्वागत किया। द प्रिंट के अनुसार विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "हम मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी की इस घोषणा की सराहना करते हैं कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बंगाल बनेगा।"

द प्रिंट के अनुसार विहिप ने कहा कि इन क़दमों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भारतीय संस्कृति व परंपरा की रक्षा होगी। बंसल ने कहा, "लैंड जिहाद पर रोक लगाकर सरकार चरमपंथियों के अवैध क़ब्ज़े से अपनी सैकड़ों एकड़ सरकारी ज़मीन वापस ले सकती है, जो निजी क्षेत्र के पास है।"

रिपोर्टों में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया नहीं थी, और न यह बताया गया कि धर्मांतरण या दूसरे प्रस्तावित क़ानूनों के विधेयक कब तैयार होंगे।

अधिकारी ने 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जब पार्टी ने उस साल का विधानसभा चुनाव जीतकर ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस का 15 साल का शासन ख़त्म किया।

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