नई दिल्ली: विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर का अपना अनुमान बढ़ाकर 7.1 फ़ीसदी कर दिया है, जबकि अप्रैल में उसने 6.6 फ़ीसदी का अनुमान दिया था। ऑल इंडिया रेडियो ने 6 अक्टूबर को यह जानकारी दी। यह संशोधन साल की उम्मीद से बेहतर शुरुआत के बाद आया है: 2026-27 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 फ़ीसदी बढ़ी, जिसमें निजी खपत और निवेश का सहारा रहा।
बैंक ने कहा कि निजी खपत विकास का मुख्य इंजन बनी रहेगी, जबकि मज़बूत सार्वजनिक निवेश और अनुकूल वित्तीय व नीतिगत हालात इसमें और मदद करेंगे। निर्यात ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है और इसे विकास के अनुमान के लिए एक अहम सकारात्मक पहलू माना गया है, हालांकि वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक अनिश्चितता निजी निवेश पर असर डाल सकती है।
आपूर्ति के मोर्चे पर, विश्व बैंक ने कहा कि औद्योगिक गतिविधि उम्मीद से बेहतर रही है, जिसमें बुनियादी ढांचे और निर्माण से जुड़े सामान और बिजली उत्पादन में अच्छी बढ़त दर्ज हुई। सेवा क्षेत्र भी तेज़ी से बढ़ रहा है, हालांकि पिछले साल के ऊंचे आधार की वजह से उसकी रफ़्तार कुछ धीमी हुई है।
कमज़ोर कड़ी खेती है। बैंक ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश की कमी ने कृषि की संभावनाओं को कमज़ोर किया है और इसका ग्रामीण मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। 1 अक्टूबर को सामने आए भारत मौसम विज्ञान विभाग के सीज़न के आख़िरी आंकड़े बताते हैं कि यह कमी कितनी बड़ी थी: जून से सितंबर के बीच देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि दीर्घकालिक औसत 868.6 मिलीमीटर है, यानी 12.6 फ़ीसदी कम। 36 में से 17 मौसम उपखंडों में, जो देश के 42 फ़ीसदी हिस्से को कवर करते हैं, बारिश कम रही, और विभाग ने अक्टूबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान दिया है।
जून तिमाही के आंकड़ों के बाद अनुमान बढ़ाने वालों में विश्व बैंक सबसे नया नाम है। 23 सितंबर को फ़िच रेटिंग्स ने इस साल का अपना अनुमान 6.4 फ़ीसदी से बढ़ाकर 6.9 फ़ीसदी किया, जिसकी वजह उसने "पहली तिमाही की मज़बूत वृद्धि और भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती" बताई। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अपना अनुमान 6.6 फ़ीसदी से बढ़ाकर 7 फ़ीसदी किया और "मज़बूत औद्योगिक गतिविधि, अच्छी उपभोक्ता मांग, सामान के मज़बूत निर्यात और तेज़ होते सरकारी निवेश" का हवाला दिया। द प्रिंट पर छपी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़, एशियाई विकास बैंक ने भी अपना अनुमान 6.6 से बढ़ाकर 7 फ़ीसदी किया, और मूडीज़ पहले ही अपना अनुमान 7 फ़ीसदी कर चुकी थी। ख़ुद भारतीय रिज़र्व बैंक को इस साल 6.7 फ़ीसदी वृद्धि की उम्मीद है।
दोनों रेटिंग एजेंसियों को साल की दूसरी छमाही में रफ़्तार धीमी होने की उम्मीद है। एसएंडपी ने कहा कि जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने और आयकर में कटौती का फ़ायदा धीरे-धीरे कम होगा, और बताया कि उसके आकलन के समय बारिश सामान्य से 15 फ़ीसदी कम थी। फ़िच का अनुमान है कि उपभोक्ता ख़र्च में वृद्धि पिछले साल के 7.2 फ़ीसदी से घटकर इस साल 5.7 फ़ीसदी रह जाएगी, और 2027-28 में विकास दर घटकर 6.5 फ़ीसदी हो जाएगी।
दूसरी चिंता महंगाई है। एसएंडपी को इस साल उपभोक्ता महंगाई औसतन 5.1 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है, और फ़िच का अनुमान है कि दिसंबर तक कुल महंगाई 5.5 फ़ीसदी तक पहुंच जाएगी। फ़िच ने कहा कि मज़बूत घरेलू मांग, बढ़ती क़ीमतों और आपूर्ति से जुड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए रिज़र्व बैंक अक्टूबर की नीति बैठक में ब्याज दरें 25 आधार अंक बढ़ा सकता है।
अप्रैल में, जब विश्व बैंक ने इस साल का अनुमान 6.3 से बढ़ाकर 6.6 फ़ीसदी किया था, तब उसने आकलन किया था कि 2025-26 में विकास दर 2024-25 के 7.1 फ़ीसदी से बढ़कर 7.6 फ़ीसदी हो गई, जिसमें मज़बूत घरेलू मांग, निर्यात की मज़बूती, कम महंगाई और जीएसटी दरों में कटौती का योगदान रहा। उसने तब यह चेतावनी भी दी थी कि ऊंची वैश्विक ऊर्जा क़ीमतें दाम बढ़ाएंगी और परिवारों की आमदनी पर दबाव डालेंगी।
अधिकारियों ने इस रुझान का स्वागत किया। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने 4 अक्टूबर को कहा कि कंपनियों का मज़बूत प्रदर्शन और लगातार पूंजी निवेश, जिसमें निजी क्षेत्र का निवेश भी शामिल है, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स और फ़िच रेटिंग्स जैसी एजेंसियों के अनुमान बढ़ाने के पीछे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के क़दमों के साथ-साथ परिवारों और कारोबारों के उठाए क़दमों ने पश्चिम एशिया संकट और तेल की क़ीमतों के झटके का अर्थव्यवस्था पर असर सीमित रखने में मदद की।
जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़े बताएंगे कि कमज़ोर मानसून और ईंधन की ऊंची क़ीमतों के बीच यह रफ़्तार बनी रही या नहीं।










