नई दिल्ली: 1 अक्टूबर को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, सितंबर में भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर संग्रह एक साल पहले के मुक़ाबले 14.7 फ़ीसदी बढ़कर 2,03,521 करोड़ रुपये रहा। यह लगातार तीसरा महीना है जब संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा।
आईएएनएस के मुताबिक़, केंद्रीय जीएसटी 37,762 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 45,363 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी 1,20,396 करोड़ रुपये रहा। रिफ़ंड के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व 18.1 फ़ीसदी बढ़कर 1,76,520 करोड़ रुपये हो गया।
अगस्त की तरह, आयात पर वसूले गए कर घरेलू संग्रह से कहीं तेज़ी से बढ़े। आयात से सकल राजस्व 25.9 फ़ीसदी बढ़कर 65,525 करोड़ रुपये रहा, जबकि सकल घरेलू राजस्व 10.1 फ़ीसदी बढ़कर 1,37,996 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 1,25,334 करोड़ रुपये था।
वित्त वर्ष की पहली छमाही, यानी अप्रैल से सितंबर तक, सकल संग्रह 12,46,278 करोड़ रुपये रहा, जो 11.6 फ़ीसदी ज़्यादा है।
अगस्त में संग्रह 14.8 फ़ीसदी बढ़कर 1,99,853 करोड़ रुपये रहा था, और तब भी आयात आगे था: उस महीने आयात से राजस्व 29 फ़ीसदी बढ़कर 62,604 करोड़ रुपये और घरेलू संग्रह 9.3 फ़ीसदी बढ़कर 1,37,249 करोड़ रुपये रहा। अगस्त में रिफ़ंड 67.9 फ़ीसदी उछलकर 31,795 करोड़ रुपये हो गए थे।
बिज़नेस टुडे की रिपोर्ट किए गए राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक़, सितंबर में सबसे ज़्यादा घरेलू जीएसटी महाराष्ट्र ने जुटाया, 29,986 करोड़ रुपये, जो 15 फ़ीसदी ज़्यादा है। कर्नाटक ने 13,884 करोड़ रुपये जुटाए, 16 फ़ीसदी ज़्यादा, और गुजरात ने 12,222 करोड़ रुपये, 17 फ़ीसदी ज़्यादा। उत्तर प्रदेश और तेलंगाना, दोनों में 18 फ़ीसदी की बढ़त रही, और संग्रह क्रमशः 8,882 करोड़ और 5,327 करोड़ रुपये रहा।
बड़े राज्यों में असम सबसे तेज़ बढ़ा, 88 फ़ीसदी, और उसका संग्रह एक साल पहले के 1,287 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,415 करोड़ रुपये हो गया। मणिपुर का संग्रह 145 फ़ीसदी बढ़कर 92 करोड़ रुपये और अरुणाचल प्रदेश का 46 फ़ीसदी बढ़कर 136 करोड़ रुपये रहा।
कई राज्यों ने एक साल पहले से कम जुटाया। तमिलनाडु का संग्रह 5 फ़ीसदी घटकर 10,188 करोड़ रुपये रह गया। उत्तराखंड का 23 फ़ीसदी घटकर 1,277 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश का 21 फ़ीसदी घटकर 640 करोड़ रुपये, और जम्मू-कश्मीर का 29 फ़ीसदी घटकर 487 करोड़ रुपये रहा।
केंद्र और राज्यों को साथ लाने वाली जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर को नई दिल्ली में होगी। यह परिषद के बड़े दर सुधार के एक साल बाद हो रही है, जिसने 22 सितंबर 2025 से ढांचे को 5 और 18 फ़ीसदी की दो मुख्य दरों में समेट दिया था, और चुनिंदा विलासिता व हानिकारक वस्तुओं पर 40 फ़ीसदी की दर रखी थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह चुकी हैं कि बैठक "जीएसटी 2.0" के तहत प्रक्रिया सुधारों पर केंद्रित रहेगी, जिनमें ई-इनवॉइसिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियम शामिल हैं, और सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि दरों में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। परिषद पिछले साल के दर बदलावों के अमल की समीक्षा भी करेगी।
आईबीटाइम्स इंडिया के मुताबिक़, चर्चा के संभावित मुद्दों में आसान जीएसटी पंजीकरण, ख़ासकर बड़ी मात्रा में टैक्स क्रेडिट आगे बढ़ाने वाले कारोबारों के लिए; इनवॉइस दाख़िल करने और मिलान की आसान व्यवस्था; और ख़रीदार व विक्रेता के रिटर्न में मेल न खाने की समस्याएं शामिल हैं। परिषद उन असली ख़रीदारों को बचाने के तरीक़ों पर विचार कर सकती है जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट इसलिए नहीं मिलता क्योंकि आपूर्तिकर्ता ने लेनदेन दर्ज नहीं किया या कर नहीं चुकाया, और साथ ही फ़र्ज़ी दावों को रोके रख सकती है। पंजीकरण और उसे रद्द करने की कुछ प्रक्रियाओं के स्वचालन पर भी चर्चा हो सकती है, ताकि केंद्र और राज्य के अलग-अलग जीएसटी अधिकारियों से निपटने वाले करदाताओं के लिए पंजीकरण एक जैसा हो। आईबीटाइम्स के मुताबिक़ बड़ा मक़सद "कारोबारों के लिए अनुपालन लागत और जीएसटी से जुड़े मुक़दमे घटाना" है।
आईबीटाइम्स इंडिया ने बिज़नेस टुडे के हवाले से बताया कि कुछ डिजिटल भुगतानों पर लगने वाले शुल्क, मर्चेंट डिस्काउंट रेट, पर 18 फ़ीसदी जीएसटी की समीक्षा भी हो सकती है, हालांकि उसने यह भी कहा कि यह मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में नहीं है। परिषद के फ़ैसले और अधिसूचनाएं जारी होने तक इनमें से कोई बदलाव लागू नहीं होगा।










