नई दिल्ली: दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की दो रिलीज़ इस पर रोशनी डालती हैं कि भारत की कंपनियां कितना निवेश करती रही हैं, और जल्द ही यह पूछेंगी कि वे आगे कितना निवेश करने की योजना बना रही हैं।
30 सितंबर को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2024-25 के लिए उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण जारी किया, जो देश के पंजीकृत कारख़ानों को कवर करता है। 1 अक्टूबर को उसने बताया कि उसने बड़ी निजी कंपनियों की निवेश योजनाओं पर एक आगे की ओर देखने वाला सर्वेक्षण, कैपेक्स 2026, शुरू किया है, जो अक्टूबर से दिसंबर तक चलेगा।
सर्वेक्षण के मुताबिक़, 2024-25 में पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र लगभग हर पैमाने पर बढ़ा। उत्पादन 7.81 फ़ीसदी और कच्चा माल 7.47 फ़ीसदी बढ़ा, और सकल मूल्य वर्धन, यानी कारख़ाने जो ख़रीदते हैं उसमें जो मूल्य जोड़ते हैं, उससे भी तेज़ी से 9.59 फ़ीसदी बढ़कर 24.58 लाख करोड़ रुपये से 26.94 लाख करोड़ रुपये हो गया।
निवेश उत्पादन से तेज़ बढ़ा। स्थिर पूंजी पिछले साल के मुक़ाबले 10.54 फ़ीसदी बढ़ी, और निवेशित पूंजी, जिसमें कच्चे माल के भंडार जैसी भौतिक कार्यशील पूंजी भी जुड़ती है, 11.10 फ़ीसदी बढ़ी। शुद्ध आय 9.68 फ़ीसदी और शुद्ध मुनाफ़ा 7.73 फ़ीसदी बढ़ा।
पंजीकृत कारख़ानों की संख्या 2.64 फ़ीसदी बढ़कर 2.60 लाख से 2.67 लाख हो गई, जिनमें से 2.19 लाख साल के दौरान चालू थे। सबसे ज़्यादा कारख़ाने तमिलनाडु में थे, 41,221, उसके बाद गुजरात में 33,084 और महाराष्ट्र में 27,379।
रोज़गार भी बढ़ा। पंजीकृत कारख़ानों में लगे लोगों की संख्या 7.19 फ़ीसदी बढ़कर 1.96 करोड़ से 2.10 करोड़ हो गई, यानी 14 लाख से ज़्यादा लोग जुड़े, और उन्हें दिया गया कुल पारिश्रमिक 12.08 फ़ीसदी बढ़ा। उद्योगों में सबसे ज़्यादा रोज़गार खाद्य उत्पादों में था, करीब 23.6 लाख लोग। कारख़ाना रोज़गार में सबसे बड़ा हिस्सा तमिलनाडु का था, 14.99 फ़ीसदी, उसके बाद महाराष्ट्र 13.08 फ़ीसदी और गुजरात 12.99 फ़ीसदी, जबकि सबसे बड़ा वेतन हिस्सा महाराष्ट्र के कारख़ानों ने दिया, देश के कुल का 17.64 फ़ीसदी।
पांच उद्योगों, मूल धातु, मोटर वाहन, रसायन, दवाएं और खाद्य उत्पाद, ने मिलकर विनिर्माण के सकल मूल्य वर्धन में 45 फ़ीसदी से ज़्यादा योगदान दिया। राज्यों में मूल्य वर्धन का सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र का था, 15.92 फ़ीसदी, उसके बाद गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश; इन पांच राज्यों का कुल में हिस्सा 54 फ़ीसदी से ज़्यादा रहा। रोज़गार के मामले में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा शीर्ष पांच राज्य रहे, जिनमें विनिर्माण की 56 फ़ीसदी से ज़्यादा नौकरियां थीं।
अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच जुटाए गए सर्वेक्षण के आंकड़े मार्च 2025 में ख़त्म हुए साल के हैं। कैपेक्स 2026 सर्वेक्षण का मक़सद ज़्यादा ताज़ा सवाल का जवाब देना है। मंत्रालय ने कहा कि यह बड़ी निजी कंपनियों से हाल के वर्षों में किए गए पूंजीगत व्यय, चालू साल के अस्थायी ख़र्च और अगले साल की निवेश योजनाओं की जानकारी जुटाएगा, और यह "उभरते निवेश रुझानों को समझने के लिए अहम जानकारी देगा।" मंत्रालय ने सर्वेक्षण के लिए चुनी गई कंपनियों से इसमें हिस्सा लेने की अपील की।
सरकार का तर्क है कि उसके अपने ख़र्च ने निजी निवेश को खींचा है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 2019-20 के 3.39 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में बजट के 12.22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है, और पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगस्त में कहा था कि इसने "असल में निजी क्षेत्र को आगे आने में मदद की है। वे अब जोखिम ले रहे हैं और निवेश कर रहे हैं।"
2024-25 में कारख़ानों की स्थिर पूंजी उनके उत्पादन से तेज़ बढ़ी। कैपेक्स 2026 के नतीजे बताएंगे कि ऊंची तेल क़ीमतों और कमज़ोर मानसून वाले साल में कंपनियां उसी रफ़्तार से ख़र्च जारी रखने की उम्मीद करती हैं या नहीं।










