नागोया: ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, जापान के आइची-नागोया में 43 खेलों में दो हफ़्ते से ज़्यादा चली प्रतियोगिता के बाद भारत 2026 एशियाई खेलों की पदक तालिका में 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य हैं। खेलों का समापन 4 अक्टूबर को नागोया सिटी मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में हुआ, जहां औपचारिक मशाल और ध्वज क़तर के प्रतिनिधियों को सौंपे गए, जो 2030 में दोहा में अगले संस्करण की मेज़बानी करेगा।
दो स्वर्ण और एक रजत जीतने वाली निशानेबाज़ नीरू ढांडा समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल को "दृढ़ संकल्प, जुनून और शानदार खेल भावना के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने" के लिए बधाई दी, और उम्मीद जताई कि ये खेल "आने वाले वर्षों में और बड़ी उपलब्धियों की प्रेरणा देंगे और ज़मीनी स्तर पर भी खेलों को मज़बूत करेंगे।"
भारत के अभियान की सबसे बड़ी पहचान क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में पुरुष और महिला, दोनों वर्गों के स्वर्ण पदक जीतना रही।
क्रिकेट में भारत ने दोनों ख़िताब बचाए। महिलाओं ने फ़ाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया। 3 अक्टूबर को निस्शिन में पुरुषों के फ़ाइनल में पहले बल्लेबाज़ी चुनते हुए भारत ने छह विकेट पर 211 रन बनाए, जिसमें अभिषेक शर्मा ने 28 गेंदों पर 61, तिलक वर्मा ने 22 गेंदों पर नाबाद 51 और शिवम दुबे ने 14 गेंदों पर 27 रन जोड़े। जवाब में पाकिस्तान छह विकेट पर 196 रन ही बना सका, जिसमें हसन नवाज़ ने 96 रन बनाए, और भारत 19 रन से जीता।
कबड्डी में महिलाओं ने ईरान को 37-34 से हराकर अपना ख़िताब बचाया, और पुरुषों ने पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए ईरान को 40-34 से हराया। हॉकी में महिलाओं ने चीन को 1-0 से हराकर 1982 के बाद एशियाई खेलों का पहला स्वर्ण जीता, और पुरुषों ने मलेशिया को 5-1 से हराकर अपना ख़िताब बचाया; दोनों जीतों से 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक का टिकट भी मिला।
स्वर्ण पदकों के लिहाज़ से मुक्केबाज़ी में भारत का यह एशियाई खेलों का सबसे अच्छा अभियान रहा: तीन स्वर्ण और तीन कांस्य। लवलीना बोरगोहेन ने अपने जन्मदिन पर महिलाओं के 75 किलो वर्ग का स्वर्ण जीता और अपने पिछले रजत को स्वर्ण में बदल दिया। परवीन हुड्डा ने महिलाओं का 65 किलो और अंकुश पंघाल ने पुरुषों का 80 किलो ख़िताब जीता। ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, नई दिल्ली पहुंचने पर पंघाल ने कहा कि अब उनका ध्यान ओलंपिक पर है।
पहलवानों ने छह पदक जीते, दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य, जो 1962 के जकार्ता खेलों के बाद एशियाई खेलों में भारत का सबसे अच्छा कुश्ती प्रदर्शन है। अमन सहरावत ने पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 57 किलो का स्वर्ण जीता और फ़ाइनल में उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 11-7 से हराया। अंतिम पंघाल ने महिलाओं के 53 किलो वर्ग में रजत और दीपक पूनिया ने पुरुषों के 97 किलो वर्ग में कांस्य जीता।
तीरंदाज़ी भारत के सबसे सफल खेलों में रही, जिसमें नौ पदक आए: पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य। कुमकुम मोहोद ने महिलाओं का व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीता, और नीरज चौहान ने पुरुषों के व्यक्तिगत रिकर्व में कांस्य जीता।
प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फ़र बनीं। मैसूर की 23 साल की खिलाड़ी ने अंतिम दौर के तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी से उबरते हुए, जिसने उनकी रात भर की तीन स्ट्रोक की बढ़त ख़त्म कर दी थी, तीन बर्डी लगाईं और 15 अंडर पार, कुल 265 के स्कोर के साथ एक स्ट्रोक आगे रहीं। अदिति अशोक और दीक्षा डागर के साथ उन्होंने टीम रजत भी जीता। 2002 में शिव कपूर के पुरुषों के व्यक्तिगत ख़िताब के बाद यह गोल्फ़ में भारत का पहला स्वर्ण है।
अकेले 3 अक्टूबर को भारत ने पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य जीते, जिससे वह एक शाम पहले के 16 स्वर्ण समेत 76 पदकों वाले पांचवें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गया।
कई क्रिकेटर सीधे घरेलू सीरीज़ में उतर रहे हैं। एशियाई खेलों की पुरुष टीम के दस सदस्य वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ के लिए चुने गए हैं, जो 6 अक्टूबर को लखनऊ से शुरू हो रही है, और बाक़ी मैच 9, 11, 14 और 17 अक्टूबर को रांची, इंदौर, हैदराबाद और बेंगलुरु में होंगे।










