अमृतसर: भारत की पुरुष हॉकी टीम 6 अक्टूबर को ढोल, मालाओं और गुलदस्तों के बीच अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरी। यह उन एशियाई खेलों के समापन के दो दिन बाद हुआ जिनमें भारतीय हॉकी ने वह कर दिखाया जो पहले कभी नहीं हुआ था: एक ही खेलों में पुरुष और महिला, दोनों टूर्नामेंट में स्वर्ण।
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, हवाई अड्डे पर प्रशंसक, पंजाब हॉकी एसोसिएशन के अधिकारी और खिलाड़ियों के माता-पिता मौजूद थे। उतरने वाले खिलाड़ियों में कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, हार्दिक और मनप्रीत सिंह शामिल थे।
पुरुषों ने 3 अक्टूबर को फ़ाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर 2022 में जीता अपना ख़िताब बचाया। हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल किए, और जुगराज, हार्दिक और शिलानंद ने एक-एक गोल किया। यह पुरुष हॉकी में भारत का पांचवां एशियाई खेल स्वर्ण था, 1966, 1998, 2014 और 2022 के बाद।
क्रेग फ़ुल्टन की कोचिंग वाली पुरुष टीम लगातार दो ओलंपिक पदक जीतकर लॉस एंजेलिस जाएगी: उसने टोक्यो 2020 में जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य जीता था, जिससे ओलंपिक पदक का 41 साल का इंतज़ार ख़त्म हुआ, और पेरिस 2024 में स्पेन को 2-1 से हराकर फिर कांस्य जीता। पुरुष हॉकी में भारत आठ ओलंपिक स्वर्ण जीत चुका है, आख़िरी 1980 में।
इस जीत से 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों के लिए सीधी क्वालीफ़िकेशन भी मिली। हरमनप्रीत ने कहा कि ओलंपिक का सीधा टिकट बहुत फ़ायदेमंद होगा, क्योंकि अब टीम के पास अपनी कमियां परखने और ओलंपिक की तैयारी के लिए पर्याप्त समय होगा। उन्होंने कहा, "कोई भी ख़िताब जीतना और फिर उसे बचाना पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और लगन का नतीजा है।" उन्होंने महिला टीम को भी उसके स्वर्ण के लिए बधाई दी।
महिलाओं ने अपने फ़ाइनल में चीन को 1-0 से हराया, जिसमें इकलौता गोल लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में किया। ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, यह 1982 के बाद एशियाई खेलों में उनका पहला स्वर्ण था, और इससे भी लॉस एंजेलिस का टिकट मिला।
टीम के रिकॉर्ड के मुताबिक़, 1982 का वह स्वर्ण नई दिल्ली खेलों में आया था, जहां भारत ने अपने सभी पांच मैच जीते, 37 गोल किए और एक खाया, और फ़ाइनल में कोरिया को हराया। उसके बाद के दशकों में महिलाओं ने 1998 और 2018 में रजत और 1986, 2006, 2014 और 2022 में कांस्य जीता, पर स्वर्ण नहीं।
ओलंपिक का टिकट महिलाओं के लिए ख़ास मायने रखता है। टीम तीन ओलंपिक खेलों में खेली है, पहली बार 1980 में, और 1980 के मॉस्को खेलों और 2020 के टोक्यो खेलों, दोनों में चौथे स्थान पर रही, जो उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन है। 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए वह क्वालीफ़ाई नहीं कर पाई थी, जब अपने क्वालीफ़ाइंग टूर्नामेंट के कांस्य पदक मैच में वह जापान से हार गई। टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन हैं।
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, यह पहली बार था जब भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने एक ही एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। क्रिकेट और कबड्डी के ख़िताबों के साथ मिलकर इससे भारत ने नागोया में तीनों टीम खेलों के पुरुष और महिला स्वर्ण अपने नाम कर लिए।
भारत ने खेलों में 85 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया, जिनमें 21 स्वर्ण हैं। हॉकी के दोनों ख़िताब खेलों के आख़िरी सप्ताहांत में आए, और पुरुषों का फ़ाइनल 3 अक्टूबर को हुआ, जिस दिन भारत ने पांच स्वर्ण जीते और तालिका में पांचवें से चौथे स्थान पर पहुंचा।
दोनों टीमों के लिए इन स्वर्ण पदकों का मतलब है कि लॉस एंजेलिस के लिए क्वालीफ़ाइंग टूर्नामेंट से नहीं गुज़रना पड़ेगा, जिस रास्ते से पेरिस से पहले महिलाओं को जाना पड़ा था और वे नाकाम रही थीं। हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि अतिरिक्त समय से टीम ओलंपिक से पहले अपनी कमज़ोरियों पर काम कर सकेगी।
दोनों टीमें अब एशियाई चैंपियन के रूप में ओलंपिक चक्र में उतर रही हैं।










