जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के नवनिर्वाचित महापौरों और नगरीय निकाय प्रमुखों से कहा है कि वे शहरों के बुनियादी काम एक महीने में, दिवाली से पहले पूरे करें। यह नगरीय निकायों की 100 दिन की कार्ययोजना का पहला क़दम है।
सोशल न्यूज़ एक्सवाईज़ेड पर छपी आईएएनएस की ख़बर और उदयपुर टाइम्स के अनुसार शर्मा ने सोमवार, 5 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ़्रेंस से नगर निगमों के महापौरों और उप महापौरों, और नगर परिषदों व नगर पालिकाओं के सभापतियों, उपसभापतियों, अध्यक्षों और उपाध्यक्षों से बात की।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सफ़ाई और कचरा प्रबंधन, सड़कों की मरम्मत, बिजली और स्ट्रीट लाइट, सीवरेज और नाले, और रंग-रोगन व सौंदर्यीकरण का काम "एक महीने के भीतर, दिवाली से पहले" पूरा हो। उन्होंने निकायों से स्थानीय तालमेल और अधिकारियों के नियमित दौरों के ज़रिए सफ़ाई, जलभराव, आवारा पशुओं, अतिक्रमण और पार्कों के रखरखाव पर काम करने को कहा।
शर्मा ने कहा, "विकास योजनाओं और काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए," और इसका फ़ायदा आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।
लेटेस्टली पर छपी एएनआई की ख़बर के अनुसार बैठक से पहले उन्होंने कहा था कि "विकसित राजस्थान का सपना विकसित शहरों से ही पूरा हो सकता है" और "एक व्यापक रोडमैप पर आधारित 100 दिन की कार्ययोजना से नगरीय निकायों का कायाकल्प होगा"। उन्होंने नए जनप्रतिनिधियों से कहा कि उन पर "लोगों की उम्मीदें पूरी करने की अहम ज़िम्मेदारी है"।
उदयपुर टाइम्स के अनुसार रोडमैप में सड़कें, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, यातायात प्रबंधन और पार्क, और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना शामिल है।
आईएएनएस की ख़बर के अनुसार मुख्यमंत्री ने जिन योजनाओं का ज़िक्र किया, उनमें स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन, शहरी इलाक़ों में अकुशल श्रमिकों के लिए 125 दिन का रोज़गार कार्यक्रम, 188 नगरीय निकायों में मुफ़्त डी-स्लजिंग सेवा के साथ फ़ीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, और हर शहर के नियोजित विकास के लिए "विकसित वार्ड अभियान" शामिल हैं।
बैठक में नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और नगर निगमों के महापौर मौजूद रहे, जबकि बाक़ी निकाय प्रमुख वीडियो से जुड़े। एएनआई के अनुसार रविवार, 4 अक्टूबर को शर्मा ने अपने आवास पर श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा और नगरीय विकास के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता के साथ तैयारी बैठक की थी।
ये निकाय प्रमुख पिछले महीने हुए नगरीय निकाय चुनावों में चुने गए। इंडिया टीवी के अनुसार जयपुर में पार्षदों के नतीजे 15 सितंबर को आए और महापौर 25 सितंबर को चुना गया।
जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर पद भाजपा ने जीते। जयपुर में वार्ड 112 के पार्षद सुनील कोठारी ने 150 सदस्यों वाले निगम में 89 वोट पाकर कांग्रेस की सुनीता मावर को हराया, जहां बहुमत का आंकड़ा 76 है। इंडिया टीवी के अनुसार जोधपुर के 100 सदस्यों वाले निगम में प्रसन्न चंद मेहता 53 के मुक़ाबले 47 वोट से जीते, जो तीनों में सबसे कम अंतर है, और कोटा में अनुसुइया गोस्वामी 65 के मुक़ाबले 35 वोट से जीतीं। जयपुर निगम के 150 वार्डों के चुनाव में क़रीब 24.33 लाख पंजीकृत मतदाता थे और मतदान क़रीब 63.55 प्रतिशत रहा।
जयपुर के मतदान पर विवाद हुआ। पंजाब केसरी के अनुसार कांग्रेस विधायक रफ़ीक़ ख़ान और अमीन कागज़ी ने निगम कार्यालय के बाहर धरना दिया और आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ पार्षदों को मतदान क्षेत्र में जाने से रोका गया। ख़ान ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की जांच की मांग की। उसी रिपोर्ट के अनुसार जयपुर निगम में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं, और उप महापौर का चुनाव 26 सितंबर को होना था।





