रांची: रांची की एक विशेष अदालत ने बुधवार, 30 सितंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर शहर के बड़गाईं इलाक़े में 8.86 एकड़ ज़मीन के कथित अवैध अधिग्रहण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय कर दिए। उसी दिन झारखंड हाई कोर्ट ने भी इससे जुड़ी एक याचिका में उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।
आरोप तय होने का मतलब है कि अदालत को मुक़दमा चलाने लायक़ सामग्री मिली है। यह दोषी ठहराया जाना नहीं है, और सोरेन ने आरोपों से इनकार किया है।
ईटीवी भारत के मुताबिक़ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के नामज़द सभी 17 आरोपियों पर आरोप तय किए, जिनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। द न्यूज़मिल के अनुसार सोरेन उनमें आख़िरी थे, जिन पर आरोप तय हुए।
ईटीवी भारत के अनुसार वीडियो कॉन्फ़्रेंस से पेश हुए सोरेन ने अदालत से कहा कि सारे आरोप झूठे हैं और वे बेक़सूर हैं। द न्यूज़मिल ने बताया कि उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया।
ईटीवी भारत के मुताबिक़ ईडी का आरोप है कि सोरेन ने जांच में सहयोग नहीं किया और उसे प्रभावित करने की कोशिश की, और एजेंसी का कहना है कि उसे और संपत्तियों की जानकारी मिली है। सोरेन को इस मामले में 31 जनवरी 2024 को गिरफ़्तार किया गया था। उनकी ओर से अधिवक्ता संजीव सहाय पेश हुए।
मुक़दमे की अगली तारीख़ को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं। ईटीवी भारत के अनुसार अदालत अगली बार 28 अक्टूबर को बैठेगी, जब अभियोजन पक्ष अपने गवाह पेश करेगा; द न्यूज़मिल के अनुसार सुनवाई 30 नवंबर को फिर शुरू होगी।
द न्यूज़मिल के मुताबिक़ सोरेन के वकीलों ने क़ानून की धारा 44(डी) को संवैधानिक रूप से अनुचित बताते हुए उसे चुनौती देने वाली याचिका भी दायर की है।
पखवाड़े भर में हाई कोर्ट में सोरेन को यह दूसरा झटका है। एशियानेट न्यूज़ेबल के अनुसार 19 सितंबर को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने विशेष अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी याचिका ख़ारिज कर दी थी। उस याचिका में सोरेन ने विशेष अदालत के जून के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी आरोपमुक्ति की अर्ज़ी ख़ारिज हुई थी। उनका तर्क था कि लोक सेवक के रूप में उन पर मुक़दमा चलाने के लिए राज्यपाल की पूर्व मंज़ूरी के बिना सुनवाई नहीं हो सकती। पीठ ने कहा कि सरकारी मंज़ूरी का संरक्षण असली सरकारी काम करने वाले लोक सेवकों को परेशान किए जाने से बचाने के लिए है, और इसे आपराधिक आरोपों के ख़िलाफ़ पूरी ढाल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मुख्य याचिका 14 अक्टूबर को सूचीबद्ध की गई।
एक अलग याचिका में सोरेन ने विशेष अदालत के 21 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ईडी की जांच पूरी होने तक आरोप तय करने की प्रक्रिया रोकने से इनकार किया गया था। सोशल न्यूज़ एक्सवाईज़ेड के अनुसार मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने बुधवार को उन्हें कोई राहत नहीं दी।
खंडपीठ ने ईडी से कहा कि वह एक पूरक हलफ़नामा दायर कर बताए कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, और 20 अक्टूबर तक इसकी प्रतियां बाक़ी पक्षों को दे। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी, जब अदालत हलफ़नामे पर विचार करेगी और याचिका पर आगे सुनवाई करेगी।
सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागमुथु पेश हुए। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार वीडियो कॉन्फ़्रेंस से जुड़े।
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा मुख्यमंत्री के साथ खड़ा रहा। द न्यूज़मिल के अनुसार पार्टी नेता मनोज पांडेय ने कहा, "यह झूठा मामला है, यह गढ़ा हुआ मामला है," और भरोसा जताया कि सोरेन बरी होंगे।
विपक्षी भाजपा ने उनके इस्तीफ़े की मांग की। पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री को "तुरंत इस्तीफ़ा देकर मुक़दमे का सामना करना चाहिए"।
रिपोर्टों के अनुसार यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में ज़मीन के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी, ज़मीन के अनियमित सौदों और उनसे हुई कमाई के कथित शोधन से जुड़ा है।





