नई दिल्ली: बिल्कुल ऑनलाइन की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से नवरात्रि और दिवाली के मौसम में निगरानी, जांच और नमूने लेने का काम तेज़ करने को कहा है, ताकि मिलावटी, नक़ली और असुरक्षित खाने की बिक्री रोकी जा सके।
एक्स पर एक पोस्ट में नियामक ने कहा कि त्योहारों में मिठाइयों, स्नैक्स, पेय पदार्थों, खाद्य तेल, और दूध व दूध उत्पादों की बढ़ी मांग के कारण ज़्यादा क़रीबी निगरानी और कार्रवाई की ज़रूरत है।
ये निर्देश 29 सितंबर 2026 की एक चिट्ठी में दिए गए हैं, जो एफ़एसएसएआई के नियामक अनुपालन प्रभाग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और एफ़एसएसएआई के क्षेत्रीय निदेशकों को भेजी है, और जो नियामक की वेबसाइट पर प्रकाशित है। इसका विषय है "खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावट रोकने के लिए विशेष त्योहारी अभियान"। चिट्ठी में कहा गया है कि नवरात्रि और दिवाली नज़दीक आने के साथ मिठाइयों, नमकीन, पेय पदार्थों, खाद्य तेल और घी, खोया और पनीर जैसे दूध उत्पादों की मांग में "पूरे देश में भारी उछाल" आता है। कार्यकारी निदेशक अमित शर्मा के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी का अंत इस वाक्य से होता है: "इस मामले को सबसे महत्वपूर्ण माना जाए।"
एफ़एसएसएआई ने राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निर्देश दिया कि नामित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी जांच करें और नमूने लें, ख़ासकर पहचाने गए हॉटस्पॉट और संवेदनशील जगहों पर।
ख़ास ध्यान वाले उत्पादों में दूध और दूध उत्पाद, मिठाइयां, स्नैक्स और नमकीन, खाद्य तेल, पेय पदार्थ और घी शामिल हैं। राज्य स्थानीय मांग वाली दूसरी चीज़ें भी जोड़ सकते हैं। एफ़एसएसएआई ने कहा, "ये वस्तुएं अलग-अलग हो सकती हैं और संबंधित क्षेत्रों में खान-पान के तरीक़ों और प्रचलन के आधार पर तय की जा सकती हैं (जैसे, उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कुट्टू आटा/सिंघाड़ा आटा का इस्तेमाल)", यानी वे आटे जो नवरात्रि के व्रत में खाए जाते हैं।
नियामक ने अधिकारियों से कहा कि जहां भी उपलब्ध हों, फ़ूड सेफ़्टी ऑन व्हील्स, यानी चलती-फिरती प्रयोगशालाएं, बड़े बाज़ारों में और ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर चुनी गई दूसरी जगहों पर तैनात की जाएं। एफ़एसएसएआई के मुताबिक़, ये वैन मौक़े पर जांच करेंगी, निगरानी मज़बूत करेंगी, उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाएंगी और त्योहारों में बिकने वाले खाने की सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ाएंगी।
अधिकारियों को जांच, नमूनों और कार्रवाई का ब्योरा एफ़एसएसएआई के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, फ़ॉसकॉस और फ़ॉसकोरिस, पर रियल टाइम में दर्ज करना होगा, ताकि नियामक देख सके कि हर राज्य क्या कर रहा है।
यह अभियान मिठाई की दुकानों, डेयरी और स्नैक बनाने वालों के लिए साल के सबसे व्यस्त हफ़्तों को कवर करता है। शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है, दशहरा 20 अक्टूबर को है और दिवाली 8 नवंबर को।
एफ़एसएसएआई त्योहारों से पहले ऐसे निर्देश जारी करता है। ऑल इंडिया रेडियो ने तब बताया था कि सितंबर 2024 में उसने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मिलावटी मिठाइयों, नमकीन और डेयरी उत्पादों के बनने और बिकने पर सख़्त निगरानी रखने और बार-बार अभियान चलाने को कहा था। उस चिट्ठी में कहा गया था कि "त्योहारों के मौसम में मिठाइयों, नमकीन, दूध और घी, खोया और पनीर जैसे दूध उत्पादों की मांग बढ़ती है", जिससे इनमें मिलावट का आर्थिक लालच बढ़ता है, और यह कि "हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी और प्रवर्तन अभियान समेत निवारक उपाय, उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इन तरीक़ों पर प्रभावी रोक लगा सकते हैं।" उसमें भी फ़ूड सेफ़्टी ऑन व्हील्स को प्रमुख बाज़ारों में तैनात करने को कहा गया था।
इस साल की चिट्ठी में सूची बढ़ाकर खाद्य तेल और पेय पदार्थ जोड़े गए हैं, व्रत वाले आटे शामिल किए गए हैं, और नतीजों को उसी वक़्त ऑनलाइन दर्ज करना ज़रूरी किया गया है।
नियामक ने यह नहीं बताया है कि वह अभियान के दौरान लिए गए और असुरक्षित पाए गए नमूनों का ब्योरा कब प्रकाशित करेगा।










