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क्राइम

सीबीआई का रिश्वत विरोधी हफ़्ता: 50 लाख रुपये के साथ सीपीडब्ल्यूडी इंजीनियर पकड़ा, एजेंसी का अपना कांस्टेबल गिरफ़्तार

हथकड़ी में एक व्यक्ति की कलाई की श्वेत-श्याम नज़दीकी तस्वीर

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अक्टूबर के पहले हफ़्ते में रिश्वत के मामलों में एक के बाद एक गिरफ़्तारियां कीं, 50 लाख रुपये के इंतज़ार में बैठे मुंबई के एक इंजीनियर से लेकर एजेंसी के अपने ही एक कांस्टेबल तक। गिरफ़्तार सभी लोग अदालत में दोष साबित होने तक निर्दोष माने जाते हैं।

सबसे बड़ा मामला मुंबई का था। फ़्री प्रेस जर्नल की 2 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक़, सीबीआई ने मुंबई में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता विक्रांत वर्मा, पुणे के उनके रिश्तेदार सौरव कुमार, और मुंबई के एक रियल एस्टेट समूह के तीन लोगों को गिरफ़्तार किया: बाया ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के उपाध्यक्ष अरविंद सेमवाल, मैनेजर चेतन महाजन, और समूह की एक फ़र्म के साझेदार ए. देशमुख।

एजेंसी ने 1 अक्टूबर को मामला दर्ज किया। आरोप है कि वर्मा ने कुमार के ज़रिए 1 करोड़ रुपये मांगे, जो बाद में घटकर 70 लाख रुपये हुए, ताकि एक अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया जा सके कि वडाला की उस ज़मीन पर सीपीडब्ल्यूडी का कोई दावा नहीं है, जिस पर समूह निर्माण परियोजना शुरू करना चाहता था।

सीबीआई ने उसी दिन, गुरुवार को, जाल बिछाया और कुमार को 50 लाख रुपये के साथ पकड़ा, जो उसने कथित तौर पर वर्मा की ओर से सेमवाल से लिए थे। वर्मा को नवी मुंबई के वाशी में पकड़ा गया, जहां वे पैसे का इंतज़ार कर रहे थे। मौजूद रहे महाजन और देशमुख को भी गिरफ़्तार किया गया।

सीबीआई ने कहा, "जांच में यह भी पाया गया कि एनओसी 50 लाख रुपये के भुगतान के बदले डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज किए बिना जारी की गई, और बाक़ी 20 लाख रुपये एक हफ़्ते बाद दिए जाने थे।" मुंबई, नवी मुंबई और पुणे में तलाशी में 50 लाख रुपये के अलावा करीब 53.87 लाख रुपये नक़द और संपत्ति के दस्तावेज़ बरामद हुए।

दिल्ली में सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने अपने ही एक कर्मचारी को गिरफ़्तार किया। एसएसबीक्रैक के मुताबिक़, एजेंसी की बैंक सिक्योरिटी एंड फ़्रॉड ब्रांच में तैनात जनरल ड्यूटी कांस्टेबल जय कुमार सिंह को 4 अक्टूबर को कोलकाता के कारोबारियों के एक वकील के साथ गिरफ़्तार किया गया, जिसे सीबीआई ने अपनी आंतरिक भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई और "शून्य सहनशीलता" नीति का हिस्सा बताया।

एफ़आईआर के मुताबिक़, सिंह 21 सितंबर को एक कथित आधिकारिक दौरे पर कोलकाता गए, कारोबारी राम चंद्र डागा से मिले, अवैध गतिविधियों की जानकारी होने का दावा किया, और डागा और उनके बेटे बसंत डागा को एक मामले में फंसाने की धमकी देकर 20 लाख रुपये मांगे। अधिकारियों के मुताबिक़, वकील बाद में "मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने" के लिए दिल्ली आया, और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के एक मॉल में हुई मुलाक़ात में रक़म कथित तौर पर 6 लाख रुपये तय हुई। एफ़आईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत छह लोगों के नाम हैं, जिनमें कांस्टेबल, दोनों कारोबारी, पश्चिम बंगाल का एक बिचौलिया और वकील शामिल हैं।

अधिकारियों ने 4 अक्टूबर को बताया कि सीबीआई ने कथित रिश्वत की मांग के मामले में तमिलनाडु में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के एक उप निदेशक को भी गिरफ़्तार किया, और उन्हें दिल्ली लाने के लिए ट्रांज़िट रिमांड मांगने की योजना है।

बिहार के आरा में उसने 4 अक्टूबर को डाक विभाग के अधिकारी पुरुषोत्तम कुमार को गिरफ़्तार किया, जब एक शाखा पोस्टमास्टर, संदीप कुमार, ने शिकायत की कि उन्होंने और एक निरीक्षक ने दो से तीन महीने से रुका वेतन जारी करने के लिए 10,000 रुपये मांगे; निरीक्षक गौरव कुमार अभी गिरफ़्तार नहीं हुए हैं। और एसएसबीक्रैक के मुताबिक़, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में एक दमकलकर्मी को 6 अक्टूबर को कटरा के एक होटल के अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की प्रक्रिया के लिए 15,000 रुपये लेते पकड़ा गया, जो मांग 40,000 रुपये से घटकर तय हुई थी।

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